कांगड़ा में महिला एवं बाल विकास योजनाओं की समीक्षा, पात्र महिलाओं व बच्चों तक लाभ पहुंचाने के निर्देश

9 अक्तूबर: हिमाचल प्रदेश सक्षम गुड़िया बोर्ड की उपाध्यक्ष अरुणा महाजन ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इनका लाभ प्रत्येक पात्र एवं जरूरतमंद महिला और बच्चे तक समयबद्ध तरीके से पहुंचेगा। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियों को मजबूत करने के निर्देश दिए।

अरुणा महाजन ने धर्मशाला स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक शर्मा सहित बाल विकास परियोजना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, सशक्तिकरण और कल्याण से संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

अरुणा महाजन ने कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिले में वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से अब तक प्राप्त 165 मामलों का निपटारा किया गया है। वहीं, महिला हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त 131 मामलों का भी निपटारा किया गया। इनमें 77 मामलों में कानूनी सहायता, 55 मामलों में मनो-सामाजिक परामर्श, 31 मामलों में पुलिस सहायता और एक मामले में अस्थायी आश्रय उपलब्ध करवाया गया। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि जिले के 15 ब्लॉकों में 183 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की समीक्षा के दौरान अरुणा महाजन ने कहा कि कांगड़ा जिले में जन्म के समय लिंगानुपात में लगातार सुधार उत्साहजनक है। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 925 था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 935 और वर्ष 2025-26 में 938 हो गया। उन्होंने बताया कि जिले में प्रारंभिक गर्भावस्था पंजीकरण की दर 87 प्रतिशत है। इसके अलावा, कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल के लिए जिले में 50 आंगनबाड़ी सह पालना (क्रेच) केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें वर्तमान में 294 बच्चे सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं।

बैठक में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री शगुन योजना और अन्य महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अरुणा महाजन ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत वर्ष 2025-26 में प्राप्त सभी 179 आवेदन स्वीकृत किए गए। वहीं, मुख्यमंत्री शगुन योजना के तहत वर्ष 2026-27 में जिले के 544 लाभार्थियों के आवेदन स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत वर्तमान में 746 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। योजना के विभिन्न घटकों के तहत बच्चों को सामाजिक सुरक्षा, आवास, विवाह, उच्च शिक्षा, कोचिंग और स्वरोजगार के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत अब तक लगभग 9.54 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।

अरुणा महाजन ने बताया कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 5,163 बच्चों को सहायता प्रदान की जा रही है। इनके लिए अब तक 4.34 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं, 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग के पात्र युवाओं को उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, छात्रावास और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिला एवं बाल विकास विभाग की सभी योजनाओं की नियमित समीक्षा करने के साथ उनके क्रियान्वयन की जमीनी स्तर पर निगरानी भी सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी पात्र महिला, बच्चा या परिवार सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

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