कांगड़ा में किरायेदारों और श्रमिकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य

13 अगस्त: जिला दंडाधिकारी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने जिले में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी किए हैं। इसके तहत मकान मालिकों, संपत्ति मालिकों, व्यवसाय संचालकों, ठेकेदारों और अन्य संबंधित लोगों को अपने परिसरों में रहने या काम करने वाले व्यक्तियों का निर्धारित विवरण संबंधित पुलिस थाने में उपलब्ध करवाना अनिवार्य किया गया है।

आदेश के अनुसार पहले से चल रही या नई किराये अथवा सब-लेटिंग व्यवस्था के संबंध में संपत्ति मालिकों और किरायेदारों को सात दिनों के भीतर संबंधित पुलिस थाने में निर्धारित घोषणा पत्र जमा करवाना होगा। इसमें पेइंग गेस्ट, दुकान, मकान आदि किराये पर देने की व्यवस्था भी शामिल है।

जिन लोगों ने अपनी भूमि या परिसर में झुग्गियां अथवा अस्थायी आवास स्थापित करने की अनुमति दी है, उन्हें भी वहां रहने वाले व्यक्तियों का विवरण पुलिस को देना होगा। वहीं घरेलू नौकरों एवं सहायकों को रखने वाले लोगों को भी निर्धारित घोषणा पत्र के माध्यम से उनका आवश्यक विवरण उपलब्ध करवाना होगा।

इसके अलावा ठेकेदारों, संपत्ति मालिकों, व्यवसाय संचालकों और अन्य नियोक्ताओं को उनके माध्यम से कार्यरत श्रमिकों एवं कामगारों का विवरण निर्धारित समय सीमा में संबंधित पुलिस थाने में प्रस्तुत करना होगा।

जिला दंडाधिकारी ने बताया कि पुलिस विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुछ ऐसे लोग भी निवास कर रहे हैं, जो संबंधित क्षेत्रों के मूल निवासी नहीं हैं और रोजगार अथवा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए यहां रह रहे हैं। इनमें से कुछ के असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी भी सामने आई है। उचित सत्यापन और रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण अपराधों की रोकथाम एवं जांच में पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मकान मालिकों, संपत्ति मालिकों, व्यवसायियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने परिसर में रहने या काम करने वाले व्यक्तियों का सत्यापित विवरण संबंधित पुलिस थाने को उपलब्ध करवाएं। इससे जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

आदेश की अवहेलना करने वाले संपत्ति मालिकों, नियोक्ताओं, किरायेदारों अथवा संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।

जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी यह आदेश 10 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है और 60 दिनों तक लागू रहेगा।

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