28 मई: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। पहले चरण में भारी मतदान और लोगों की सक्रिय भागीदारी के बाद अब 28 मई को दूसरे चरण का मतदान कराया जाएगा। इस चरण में जिले की 282 ग्राम पंचायतों में मतदाता अपने गांव की नई सरकार चुनेंगे। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
जिले में दूसरे चरण के लिए 1616 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां 1616 पोलिंग पार्टियों को चुनाव सामग्री के साथ तैनात कर दिया गया है। दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में टीमें पहले ही पहुंच चुकी हैं ताकि मतदान के दिन किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन का दावा है कि सभी केंद्रों पर जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
इससे पहले 26 मई को हुए पहले चरण के मतदान में जिले की 287 पंचायतों में 75.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इस दौरान महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 81 प्रतिशत से अधिक मतदान कर लोकतंत्र में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई। पहले चरण की सफलता के बाद दूसरे चरण को लेकर भी ग्रामीण इलाकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हैं और कई जगह मतदान को उत्सव की तरह मनाने की तैयारियां की जा रही हैं।
मतदान को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि मोबाइल पेट्रोलिंग टीमें भी लगातार गश्त करेंगी। जिला प्रशासन की ओर से कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से मतदान प्रक्रिया की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। किसी भी शिकायत या गड़बड़ी से निपटने के लिए विशेष टीमें भी तैनात रहेंगी।
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और हर मतदान केंद्र से जुड़ी जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचती रहेगी। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण मतदान में सहयोग की अपील की है।
वहीं, नगरोटा बगवां के विकास खंड बड़ोह की ग्राम पंचायत सरूट से अल्पना शर्मा लगातार सातवीं बार प्रधान चुनी गई हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 128 मतों से हराकर जीत दर्ज की। अल्पना शर्मा ने पहली बार वर्ष 1995 में चुनाव जीता था और तब से लगातार पंचायत राजनीति में अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय पंचायत की जनता के विश्वास और समर्थन को दिया है।