8 जून: शिमला के समीप मशोबरा में प्रदेश के पहले महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ‘नव-जीवन’ का उद्घाटन आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नशा, विशेषकर चिट्टा, केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक और मानवीय संकट है। सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह केंद्र नशे की शिकार महिलाओं को सुरक्षित आवास, चिकित्सकीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुनर्वास और परिवार आधारित सहयोग उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र में दूसरा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र कांगड़ा जिले के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि नशे के शिकार युवा और महिलाएं अपराधी नहीं हैं, लेकिन नशा बेचने वाले तस्कर समाज के दुश्मन हैं। सरकार की नीति पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता और तस्करों के प्रति सख्ती की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई महिला नशे की चपेट में आती है तो उसका प्रभाव पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है, इसलिए उपचार और पुनर्वास के साथ-साथ तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 नवंबर को शिमला से शुरू किया गया ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ अब व्यापक सामाजिक अभियान का रूप ले चुका है। इसमें युवा, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम नागरिक सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने लोगों से नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सहयोग देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार पीआईटी-एनडीपीएस जैसे कड़े प्रावधानों के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। तस्करों की संपत्तियों की पहचान की जा रही है और नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।