16 सितंबर:सतलुज जल विद्युत परियोजना चरण-2 से प्रभावित क्षेत्रों की लंबे समय से अनदेखी के आरोपों को लेकर मंगलवार को करसोग में ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। विधायक दीप राज के नेतृत्व में मंगन, परलोग, बेलूधांक सहित अन्य प्रभावित पंचायतों के ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में स्कूली बच्चे भी अपनी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर शामिल हुए।
प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनने के लिए एसडीएम कार्यालय के भीतर बैठक बुलाए जाने की बात कही गई, लेकिन प्रदर्शनकारी कार्यालय के अंदर जाने को तैयार नहीं हुए। ग्रामीणों की मांग थी कि अधिकारी बाहर आकर उनके बीच बैठकर समस्याएं सुनें। करीब अढ़ाई घंटे तक प्रदर्शनकारी कार्यालय के बाहर डटे रहे, जिससे मिनी सचिवालय और न्यायालय मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ। बाद में एसडीएम और परियोजना अधिकारियों ने बाहर आकर ग्रामीणों से बातचीत की, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।
धरने को संबोधित करते हुए विधायक दीप राज ने एसजेवीएनएल प्रबंधन पर प्रभावित क्षेत्र की जनता की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रबंधन प्रभावित लोगों को गुमराह कर रहा है। उनका आरोप है कि शिमला ग्रामीण के प्रभावित क्षेत्रों की तुलना में करसोग को कम बजट दिया गया है, जबकि यहां की जनता आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रही है। विधायक ने कहा कि लाडा के तहत एसजेवीएनएल की ओर से अब तक करीब 9 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं और यह राशि भी पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि बिंदला, मंगन और बेलूधांक के लिए सड़क का काम शुरू होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन में पहुंचे मंगन, परलोग और बेलूधांक क्षेत्र के स्कूली बच्चों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। बच्चों ने बताया कि स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें प्रतिदिन करीब चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद सतलुज नदी पर बने झूलापुल को पार करना पड़ता है। बरसात के दौरान यह रास्ता और भी जोखिमभरा हो जाता है। बच्चों ने कहा कि उन्हें सुरक्षित स्कूल पहुंचने के लिए सड़क की सुविधा चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने सतलुज नदी पर लोहे के पुल का निर्माण, प्रभावित गांवों तक पक्की सड़क, पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना और परियोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग उठाई। ग्रामीणों ने कहा कि ये मांगें क्षेत्र के लोगों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी हैं और लंबे समय से इन्हें उठाया जा रहा है।
धरने के अंत में ग्रामीणों ने प्रशासन और एसजेवीएनएल प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि मरौला से बिंदला तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया तो वे परियोजना स्थल पर जाकर एसजेवीएनएल के कार्य को बाधित करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि विकास कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए।