25 अप्रैल: प्रदेश हाईकोर्ट ने आपदा राहत कार्यों में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के प्रभावी उपयोग में लापरवाही पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच राज्य दो बार गंभीर आपदाओं का सामना कर चुका है, इसके बावजूद सरकार ने कोई ठोस सबक नहीं लिया और न ही उच्च स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की गई।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान उद्योग विभाग द्वारा दायर शपथ पत्र पर भी टिप्पणी की। इसमें कहा गया था कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135(7) के तहत जुर्माने से जुड़ी प्रक्रिया केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आती है और इस संबंध में 28 फरवरी 2026 को मंत्रालय के साथ मामला उठाया गया है।
अदालत ने यह भी पाया कि उद्योग विभाग अभी तक संबंधित कंपनियों से डेटा एकत्र करने और आपदा प्रबंधन में उनके योगदान को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में ही है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि आपदा के बाद पुनर्वास के लिए CSR फंड के उपयोग को लेकर कौन-कौन से निर्देश जारी किए गए। साथ ही यह भी बताया जाए कि क्या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जिलावार आधार पर बुनियादी ढांचे का कोई मूल्यांकन किया है।
अदालत ने पेयजल योजनाओं, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जुड़े कार्यों का भी पूरा विवरण मांगा है, जिन्हें CSR फंडिंग के तहत किया जाना था।