अब राज्य में उगाई जाएंगी परम्परागत फसलें कोदा व लाल चावल

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आवाज़ ए हिमाचल 
01 दिसंबर। राज्य में परंपरागत फसलों को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। अब हिमाचल में मोटे अनाज कोदा और लाल चावल के खेत फिर से लगाए जाएंगे। इस संबंध में मंगलवार को परंपरागत फसलों के उत्पादन को लेकर मंत्रिमंडल ने अहम फैंसला लिया है। परंपरागत फसलों के बीजसंवर्धन पर प्रदेश सरकार पहले चरण में पांच करोड़ रुपये खर्च करने वाली है, जिससे किसान इन बीजों का इस्तेमाल कर मोटा अनाज सहित लाल चावल का,

उत्पादन बढ़ाया जा सके और किसानों की आय भी बढ़ाई जा सके। मोटे अनाज कोदरा के आटे का इस्तेमाल करना विभिन्न बीमारियों में लाभकारी माना जाता है। वर्तमान में मोटे अनाज करने का प्रचलन भी बढ़ा है और उपभोक्ता इसे दैनिक इस्तेमाल करने लगे हैं। प्रदेश में अब इसकी बाजार मांग तेजी से बढ़ने लगी है। मोटे अनाज की मांग को देखते हुए प्रदेश में किसानों को परंपरागत फसलों का उत्पादन करने के लिए सरकार प्रोत्साहित करने लगी है।

वर्तमान समय में मोटे अनाज की मांग बढ़ने के साथ किसानों को इन फसलों के मुंह मांगे दाम भी मिल रहे हैं। राज्य में कोदरा, चीणी, मक्का, धान के उन्नत बीच विकसित करके उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में परंपरागत मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने फैंसला लिया है। मोटे अनाज के उन्नत बीज पर 5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके बाद मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

 

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