इंदौरा में पकड़े गए अवैध लकड़ी से लदे दो ट्रक, वन माफिया की बड़ी खेप जब्त

14 जुलाई:हिमाचल प्रदेश की बेशकीमती वन संपदा को अवैध रूप से पंजाब ले जाने की कोशिश को इंदौरा वन विभाग ने विफल कर दिया। विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए अवैध लकड़ी से लदे दो ट्रकों को जब्त किया। हालांकि, इस कार्रवाई ने कांगड़ा जिले में वन विभाग और अन्य निगरानी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दोनों ट्रक पालमपुर से करीब 100 किलोमीटर का सफर तय कर इंदौरा तक पहुंच गए और रास्ते में कहीं नहीं रोके गए।

वन माफिया रात के अंधेरे और भारी बारिश का फायदा उठाकर लकड़ी को पंजाब सीमा पार पहुंचाने की फिराक में था। लेकिन वन परिक्षेत्र अधिकारी अब्दुल हमीद के नेतृत्व में कंडवाल में नाकाबंदी कर रही टीम ने मालवाहक वाहनों की जांच के दौरान तिरपाल से ढके दो ट्रकों (HP 74B-6767 और HP 37F-9727) को रोक लिया। तलाशी लेने पर ट्रकों में विभिन्न प्रजातियों की बेशकीमती लकड़ी बरामद हुई।

जांच के दौरान ट्रक चालक लकड़ी के कटान या परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने बताया कि लकड़ी पालमपुर के डरोह क्षेत्र से पंजाब ले जाई जा रही थी। इसके बाद वन विभाग ने दोनों ट्रकों को जब्त कर वन परिक्षेत्र कार्यालय इंदौरा (भदरोया) पहुंचा दिया।

वन परिक्षेत्र अधिकारी अब्दुल हमीद ने बताया कि मामले की जांच के लिए डीएफओ नूरपुर के माध्यम से डीएफओ पालमपुर से पत्राचार किया जाएगा। यह पता लगाया जाएगा कि लकड़ी वन भूमि से काटी गई है या निजी भूमि से। यदि लकड़ी वन भूमि से काटी गई पाई गई तो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामला अदालत भेजा जाएगा। वहीं, निजी भूमि से कटान होने की स्थिति में भी नियमानुसार भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पालमपुर के डरोह से इंदौरा तक 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के बावजूद ट्रकों को किसी पुलिस नाके, चौकी या वन विभाग के बैरियर पर नहीं रोका गया। यदि इंदौरा वन विभाग की टीम सतर्कता नहीं दिखाती, तो यह खेप आसानी से पंजाब पहुंच सकती थी। इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

उधर, डीएफओ पालमपुर डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि डरोह क्षेत्र में अवैध कटान का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि चालक गलत जानकारी दे रहे हैं या फिर संबंधित क्षेत्र में अवैध कटान की जानकारी विभाग तक नहीं पहुंची। पूरे मामले की सच्चाई अब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगी।

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