14 जुलाई: मंडी जिला के तहत करसोग पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। पंचायत समिति में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा समर्थित खेमा दोनों प्रमुख पदों को अपने पास रखने में नाकाम रहा। वहीं, मात्र चार सदस्य होने के बावजूद कांग्रेस ने रणनीतिक चाल चलते हुए दोनों पदों पर कब्जा जमा लिया।
चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा समर्थित सदस्य इशरा मेहता को अध्यक्ष पद के लिए और कली चौहान को उपाध्यक्ष पद के लिए समर्थन दिया। मुकाबला बेहद कांटे का रहा और दोनों उम्मीदवारों ने एक-एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की। इस अप्रत्याशित नतीजे से भाजपा खेमे में मायूसी छा गई, जबकि कांग्रेस समर्थकों ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया।
15 सदस्यीय करसोग पंचायत समिति में भाजपा समर्थित 10 सदस्य, कांग्रेस समर्थित 4 सदस्य और एक निर्दलीय सदस्य निर्वाचित हुआ था। संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने के कारण उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन मतदान के दौरान हुए उलटफेर ने सभी राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
सूत्रों के अनुसार, मतदान से पहले दोनों दलों ने अपने-अपने सदस्यों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग रोकने के प्रयास किए थे। भाजपा ने भी टूट-फूट रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई थी, लेकिन अंतिम समय में यह रणनीति सफल नहीं हो सकी और पार्टी दोनों महत्वपूर्ण पद गंवा बैठी।
इससे पहले चुराग पंचायत समिति के चुनाव में भी ऐसे ही अप्रत्याशित राजनीतिक परिणाम सामने आए थे। करसोग में हुए इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि पंचायत समिति की राजनीति में केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि समय पर बनाई गई रणनीति और समर्थन भी जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पंचायत समिति में बने नए राजनीतिक समीकरण आगे किस दिशा में जाते हैं।