13 जुलाई: कुल्लू की विशेष न्यायाधीश (सत्र न्यायाधीश) प्रकाश चंद राणा की अदालत ने सोमवार को मानव तस्करी, जबरन वेश्यावृत्ति और पोक्सो अधिनियम से जुड़े एक मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों में शिव शंकर उर्फ सिकंदर, नितिन जैन उर्फ मन्नू और पीड़िता की मां शामिल हैं।
अदालत ने मुख्य आरोपी शिव शंकर उर्फ सिकंदर को दुष्कर्म, मानव तस्करी, आपराधिक साजिश, धमकी और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए अलग-अलग अपराधों के लिए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के अलावा अन्य धाराओं में 5 वर्ष और 3 वर्ष की सजा सुनाई। नितिन जैन उर्फ मन्नू को भी मानव तस्करी, पोक्सो अधिनियम, आपराधिक साजिश और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ अन्य धाराओं में 7 वर्ष, 5 वर्ष और 3 वर्ष की सजा दी गई।
अदालत ने पीड़िता की मां को अपनी ही बेटी को देह व्यापार में धकेलने का दोषी मानते हुए मानव तस्करी, आपराधिक साजिश, पोक्सो अधिनियम और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा अन्य धाराओं में अतिरिक्त सजा और जुर्माना लगाया। अदालत ने यह भी कहा कि जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी।
जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने बताया कि यह मामला 29 अप्रैल 2018 को सामने आया था। चाइल्ड हेल्पलाइन मनाली की टीम एक नाबालिग पीड़िता को लेकर पुलिस थाना मनाली पहुंची थी, जहां शिकायत दर्ज करवाई गई। शिकायत में आरोप था कि बच्ची और अन्य युवतियों को जान से मारने की धमकी देकर जबरन देह व्यापार में धकेला जाता था, क्लबों में डांस करवाया जाता था और होटलों में ग्राहकों के पास भेजकर उनसे अवैध कमाई की जाती थी।
जांच के दौरान पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसकी सगी मां ने ही उसे इस कारोबार में धकेला था। इसके बदले मुख्य आरोपी सिकंदर ने उसकी मां को हर महीने 40 हजार रुपये देने का वादा किया था। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध किए, जिसके बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।