मानसून की पहली बारिश में ही शिमला बेहाल, कई जगह भूस्खलन और जलभराव से बढ़ी परेशानी

7 जुलाई: मानसून की पहली ही बारिश ने राजधानी शिमला की व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली। सोमवार को हुई लगातार बारिश के चलते शहर के कई हिस्सों में भूस्खलन, जलभराव, सड़क धंसने और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। रिज मैदान के समीप चर्च-झांसी पार्क मार्ग, मिनी कुफटाधार और भट्टाकुफर फलमंडी सबसे अधिक प्रभावित रहे, जबकि चमियाणा रोड पर एक सूखा पेड़ गिरने से चार वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। कई स्थानों पर लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और पूरे दिन दहशत का माहौल बना रहा।

सबसे गंभीर स्थिति रिज मैदान स्थित चर्च के समीप झांसी पार्क मार्ग पर देखने को मिली, जहां सुरक्षा दीवार (डंगा) भरभराकर गिर गई। इसके चलते चर्च से यूएस क्लब जाने वाली सड़क में भी दरारें पड़ गई हैं, जिससे क्षेत्र में दोबारा भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। एहतियात के तौर पर नगर निगम ने प्रभावित हिस्से को तिरपाल से ढक दिया है, लेकिन लगातार बारिश होने पर स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है। यह मार्ग शहर के प्रमुख पैदल मार्गों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक आवाजाही करते हैं।

मिनी कुफटाधार में नाला जाम होने से बारिश का पानी और मलबा सड़क पर फैल गया, जिससे सड़क नाले में तब्दील हो गई। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत और नाले में कलवर्ट निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं होने से पहली ही बारिश में हालात बिगड़ गए।

उधर, भट्टाकुफर फलमंडी में भी बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया। पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने से फलमंडी की छत पर चट्टानें आ गिरीं, जबकि बारिश का पानी मंडी परिसर में घुसने से कई स्थानों पर जलभराव हो गया। फलों की पेटियां भीगने से बागवानों और आढ़तियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों और डंगों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि आगामी बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

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