हाईकोर्ट ने जनजातीय क्षेत्रों की पंचायतें भंग करने के फैसले पर लगाई अंतरिम रोक

2 जुलाई: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए जनजातीय क्षेत्रों की पंचायती राज संस्थाओं को समय से पहले भंग करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने का कानूनी अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश दीपक चौहान और अन्य प्रतिनिधियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। साथ ही मौजूदा जनप्रतिनिधियों को अगले आदेश तक अपने पदों पर कार्य जारी रखने की अनुमति भी दी गई है।

अदालत ने राज्य सरकार की 24 जून 2026 की उस अधिसूचना पर रोक लगा दी, जिसके तहत केलांग और पांगी की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 17 अक्टूबर 2026 तक है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मई 2026 में नए चुनाव जरूर कराए गए, लेकिन इससे वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल समय से पहले समाप्त नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 6 जून 2026 की अधिसूचना में नए निर्वाचित प्रतिनिधियों की पहली बैठक 18 अक्टूबर 2026 तय की थी, लेकिन बाद में 24 जून को नई अधिसूचना जारी कर बैठक की तारीख 27 जून कर दी। अदालत ने इसे मौजूदा जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को होगी। तब तक केलांग और पांगी क्षेत्र में मौजूदा जनप्रतिनिधि अपने पदों पर बने रहेंगे।

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