1 जुलाई, रवि दत्त भारद्वाज : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ उपमंडल स्थित गिरिपुल के प्राचीन काली मठ में दुर्लभ ब्रह्म कमल खिलने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। हिमालयी क्षेत्र का यह पवित्र पुष्प सामान्यतः ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में पाया जाता है, लेकिन काली मठ परिसर में इसके खिलने को श्रद्धालु विशेष आध्यात्मिक महत्व से जोड़कर देख रहे हैं।
काली मठ के पीठाधीश्वर स्वामी शरभेश्वरानंद महाराज ने बताया कि मठ परिसर में ब्रह्म कमल का खिलना देवी-देवताओं की विशेष कृपा और शुभ संकेत माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिव्य पुष्प के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और इसे आस्था का अद्भुत प्रतीक मान रहे हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म कमल का उल्लेख ऋग्वेद सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। धार्मिक विश्वास है कि इस पवित्र पुष्प के दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
ब्रह्म कमल मुख्य रूप से हिमालय के ऊंचे और शीतल क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से खिलता है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ और केदारनाथ में भगवान के पूजन में भी इस पुष्प का विशेष महत्व माना जाता है।
काली मठ में ब्रह्म कमल के खिलने की सूचना मिलने के बाद आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमी भी इसे देखने पहुंच रहे हैं।
बाइट : स्वामी शरभेश्वरानंद महाराज, पीठाधीश्वर, काली मठ, गिरिपुल।