29 जून तरसेम जरयाल : राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय धर्मशाला में सोमवार को हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ (HGCTA) की राज्य स्तरीय महासभा का आयोजन किया गया। स्थानीय इकाई की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के हमीरपुर, चंबा, सोलन, कांगड़ा, शिमला, मंडी, बिलासपुर और ऊना जिलों के करीब 50 महाविद्यालयों से 200 से अधिक प्रतिनिधियों और डेलीगेट्स ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया रहे, जबकि महासभा की अध्यक्षता संघ की राज्य अध्यक्षा डॉ. बनिता सकलानी ने की। राज्य महासचिव प्रो. संजय कांगो ने महासभा का संचालन करते हुए संगठन की गतिविधियों और भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर स्थानीय इकाई के अध्यक्ष डॉ. विक्रम श्रीवत्स, सचिव डॉ. आशीष रंजन, प्रेस सचिव डॉ. गौरव महाजन, कोषाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने अपने संबोधन में प्रदेशभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शिक्षक कल्याण और उनकी जायज मांगों का समर्थन करते हुए बेहतर अकादमिक वातावरण बनाने पर बल दिया।
राज्य अध्यक्षा डॉ. बनिता सकलानी ने संघ की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि HGCTA के प्रयासों से दो चरणों में असिस्टेंट प्रोफेसरों का नियमितीकरण संभव हुआ। उन्होंने बताया कि कॉलेज शिक्षकों के लिए स्टडी लीव की बहाली, कॉलेज स्तर पर पीएचडी गाइडशिप की अनुमति तथा भर्ती नियमों से जुड़े मुद्दों पर संघ ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि अब संघ का मुख्य फोकस आगामी चुनाव, CAS अधिसूचना और DPC प्रक्रिया को समयबद्ध पूरा करवाना है।
राज्य महासचिव प्रो. संजय कांगो ने बताया कि अगस्त में HGCTA के राज्य स्तरीय चुनाव कराए जाएंगे। उन्होंने मूल्यांकन पारिश्रमिक में वृद्धि को भी संघ की उपलब्धि बताया। CAS और DPC की मांगों को लेकर उन्होंने घोषणा की कि 6 जुलाई से पूरे प्रदेश में गेट मीटिंग और काले बिल्ले लगाकर विरोध प्रदर्शन का पहला चरण शुरू किया जाएगा।
महासभा में संघ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. निखिल सरटा, डॉ. सुरिंदर ठाकुर, डॉ. चंदर वर्मा, डॉ. सतपाल खूंद, डॉ. वीरेंद्र शर्मा और डॉ. वीरेंद्र सिंह ने भी विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर अपने सुझाव रखे।