18 जून: भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा दोहरा अंशदान समझौता 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई बैठक के बाद इसकी घोषणा की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा और व्यापार व निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारतीय किसानों, श्रमिकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप्स और नवाचार क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इसे विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क लागू होगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, रसायन और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
दोहरा अंशदान समझौते के तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा अंशदान के दोहरे भुगतान से राहत मिलेगी। इस सुविधा का लाभ 75 हजार से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक नियोक्ताओं को मिलेगा। साथ ही छूट की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह अगली पीढ़ी का व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा और विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती प्रदान करेगा।
समझौते के लागू होने के बाद प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, समुद्री उत्पादों, इंजीनियरिंग वस्तुओं, वाहन कलपुर्जों, जूते-चप्पलों, वस्त्र एवं परिधान, रसायन तथा फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। इससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।