17 जून : प्रदेश के जलाशयों में प्रजनन काल के चलते दो माह के लिए मत्स्य आखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। ऐसे में पंजीकृत मछुआरों की आजीविका प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस अवधि में प्रत्येक पात्र मछुआरे को करीब आठ हजार रुपये की सहायता राशि मिलेगी, जिससे प्रदेश के लगभग 13 हजार पंजीकृत मछुआरे लाभान्वित होंगे।
मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो जाता है और उनके सामने आय का संकट खड़ा हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की मत्स्य संपदा योजना के तहत सहायता राशि प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत कुल 4500 रुपये का प्रावधान है, जिसमें 2400 रुपये केंद्र सरकार, 600 रुपये प्रदेश सरकार तथा 1500 रुपये मछुआरे के अंशदान के रूप में शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने हाल ही में मछुआरा सम्मान निधि योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र मछुआरों को 3500 रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाएगी। इस तरह दोनों योजनाओं का लाभ मिलाकर प्रत्येक पंजीकृत मछुआरे को करीब आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
मत्स्य विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने बताया कि मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा यह सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ केवल विभाग में पंजीकृत मछुआरों को ही मिलेगा, जिससे प्रतिबंध अवधि में उनकी आर्थिक परेशानियां कम हो सकें।