सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परवाणू नगर परिषद में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव हुआ दिलचस्प, मुकाबला 5-5 की बराबरी पर

15/06/2026 आवाज़ ए हिमाचल

परवाणू नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 4 जून के आदेश पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निकायों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी मतदान करने के पात्र होंगे। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया है कि ऐसे चुनावों के परिणाम हाईकोर्ट में लंबित मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
परवाणू नगर परिषद की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो यहां भाजपा के 5 पार्षद और कांग्रेस के 4 पार्षद हैं। पहले यह माना जा रहा था कि भाजपा अपने संख्याबल के आधार पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर आसानी से कब्जा कर सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय विधायक का वोट भी शामिल होने से पूरा गणित बदल गया है। परवाणू विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक कर रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस का आंकड़ा 4 से बढ़कर 5 हो जाता है। इस तरह अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में दोनों दलों की ताकत 5-5 की बराबरी पर पहुंच गई है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि दोनों पक्ष अपने-अपने वोट सुरक्षित रखते हैं तो स्थिति बराबरी की बन सकती है। ऐसी परिस्थिति में चुनावी नियमों के अनुसार फैसला टॉस, लॉटरी अथवा पर्ची प्रणाली से भी हो सकता है। यानी नगर परिषद का अगला अध्यक्ष या उपाध्यक्ष केवल राजनीतिक समर्थन से नहीं बल्कि किस्मत के सहारे भी तय हो सकता है। यही कारण है कि शहर भर में इन चुनावों को लेकर उत्सुकता और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की अटकलें और भ्रामक दावे भी सामने आ रहे हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल अंतरिम राहत दी है और विधायक के मतदान अधिकार को फिलहाल बहाल किया है। चुनाव का परिणाम अंतिम रूप से न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेगा। ऐसे में जनता को किसी भी अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास करने के बजाय न्यायालय के आदेश और निर्वाचन प्रक्रिया के आधिकारिक निर्णय का इंतजार करना चाहिए। फिलहाल परवाणू नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी का रास्ता पूरी तरह खुल चुका है, लेकिन बराबरी के समीकरण ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है, जहां राजनीतिक रणनीति के साथ-साथ किस्मत की भी अहम भूमिका देखने को मिल सकती है।

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