13 जून : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयास अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। मंडी जिले का नागरिक चिकित्सालय करसोग इसका एक प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ के दम पर गंभीर मरीजों का सफल उपचार संभव हो रहा है।
प्रदेश सरकार की आदर्श स्वास्थ्य संस्थान योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी क्रम में नागरिक अस्पताल करसोग में भी स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं।
हाल ही में करसोग क्षेत्र के 58 वर्षीय एक गंभीर मरीज को, जो करीब एक वर्ष से आईजीएमसी शिमला के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर उपचाराधीन था, 23 मई 2026 को विशेष वेंटिलेटर एंबुलेंस के माध्यम से नागरिक चिकित्सालय करसोग स्थानांतरित किया गया। यह प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार किसी बड़े चिकित्सा संस्थान से वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहे मरीज को उपमंडल स्तर के अस्पताल में सफलतापूर्वक उपचार के लिए शिफ्ट किया गया।
मरीज करसोग के समीप नोवा गांव का निवासी है, जिसके फेफड़ों की नसें एक दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थीं। लंबे समय तक शिमला में उपचार के कारण परिवार को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में नागरिक अस्पताल करसोग में उपचार की व्यवस्था परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई।
मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ महीनों में विशेष तैयारियां कीं। अस्पताल में 24 घंटे ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित की गई, बंद पड़े वेंटिलेटर को ठीक करवाया गया और आपातकालीन विभाग में आईसीयू सेटअप विकसित किया गया। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।
वर्तमान में मरीज की देखभाल पीजीआई चंडीगढ़ से एमडी मेडिसिन डॉ. कृतिका के नेतृत्व में गठित टीम कर रही है। टीम में स्टाफ नर्स, ओटीए और अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं, जो मरीज की निगरानी, दवा प्रबंधन और वेंटिलेटर सपोर्ट सुनिश्चित कर रहे हैं। आईजीएमसी शिमला के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ भी लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है।
नागरिक अस्पताल करसोग की यह उपलब्धि इस धारणा को बदल रही है कि गंभीर मरीजों का उपचार केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ही संभव है। अस्पताल का तीन बेड वाला आईसीयू और प्रशिक्षित स्टाफ अब क्षेत्र के गंभीर मरीजों के लिए जीवनदायिनी सुविधा बन चुका है।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोपाल चौहान ने बताया कि मरीज की स्थिति फिलहाल स्थिर है और पूरी चिकित्सकीय टीम समर्पण के साथ उसकी देखभाल कर रही है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में करसोग अस्पताल की यह उपलब्धि प्रदेश सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की सोच को धरातल पर साकार करती नजर आ रही है।