7 जून : मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम जनहितकारी फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में सरकारी भूमि पर वर्षों से रह रहे भूमिहीन परिवारों और सीमांत किसानों को राहत देने के लिए नियमितीकरण नीति-2026 को स्वीकृति दी गई। इस नीति के तहत 20 बीघा से कम भूमि पर कब्जा रखने वाले पात्र लोगों को लाभ मिल सकेगा। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
मंत्रिमंडल ने करुणामूलक नियुक्तियों से जुड़े 2542 लंबित और अस्वीकृत मामलों की दोबारा समीक्षा करने का भी फैसला लिया है। वित्त विभाग इन मामलों की जांच कर आवश्यक राहत देने की संभावनाओं पर विचार करेगा।
किसानों को राहत देते हुए सरकार ने कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर देय ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। इस योजना से प्रदेश के लगभग 6356 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
बैठक में अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को अब पूर्ण वेतन देने का निर्णय लिया गया। पहले कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश के दौरान केवल 40 प्रतिशत वेतन मिलता था।
इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक लगातार 7 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अंशकालिक कर्मचारियों को दैनिक वेतनभोगी बनाने की मंजूरी दी गई है। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। वहीं, जॉब ट्रेनी कर्मचारियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश देने का भी निर्णय लिया गया।
रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के चौथे चरण को मंजूरी दी है। योजना के तहत युवाओं को बस खरीदने पर सब्सिडी दी जाएगी तथा करीब 1000 बस रूटों पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके साथ ही विभिन्न विभागों में मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती प्रक्रिया को केंद्रीकृत करने के लिए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित करने का फैसला भी लिया गया है।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से किसानों, कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं और जरूरतमंद परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा तथा प्रदेश में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।