25 मई, रवी दत्त भारद्वाज: राजगढ़ सिरमौर के बड़ू साहिब स्थित इटरनल यूनिवर्सिटी का 13वां दीक्षांत समारोह गरिमामय और आध्यात्मिक माहौल में आयोजित किया गया। समारोह में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत शब्द कीर्तन से हुई और समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से छात्राएं, अभिभावक, शिक्षाविद और गणमान्य अतिथि शामिल हुए। विश्वविद्यालय परिसर पूरे दिन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक अकादमिक शोभायात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विश्वविद्यालय प्रशासन और अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पटके पहनाकर किया गया। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं कलगीधर ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबा डॉ. देविंद्र सिंह ने की। ईग्रो फाउंडेशन के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. चरण सिंह मुख्य अतिथि तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ. हरप्रीत कौर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
कुलपति डॉ. नीलम कौर ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास करना है।
समारोह में 175 छात्राओं को स्नातक, 54 छात्राओं को स्नातकोत्तर और 16 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को स्वर्ण और रजत पदकों सहित मेरिट प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में बाबा डॉ. देविंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मानवता, सेवा और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि कलगीधर ट्रस्ट उत्तर भारत के पांच राज्यों में 131 विद्यालय और हिमाचल व पंजाब में विश्वविद्यालय संचालित कर रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ. चरण सिंह ने छात्राओं को तकनीकी शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया, जबकि डॉ. हरप्रीत कौर ने भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने और निरंतर सीखते रहने पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की स्मारिका और अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। साथ ही मेधावी छात्राओं को छात्रवृत्तियां प्रदान की गईं। पूरे आयोजन में अनुशासन, सांस्कृतिक गरिमा और आध्यात्मिक वातावरण की विशेष झलक देखने को मिली।