7 मई: प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने रीना देवी व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 जून को होगी।
याचिकाकर्त्ताओं का कहना था कि आशा वर्कर सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आतीं, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने से रोकना उचित नहीं है। याचिका में बताया गया कि 2 मई 2026 को जारी स्पष्टीकरण में आशा कार्यकर्ताओं को निश्चित मानदेय और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पर अंशकालिक रूप से कार्यरत माना गया और इसी आधार पर हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(जी) के तहत उन्हें पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया।
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया माना कि आशा वर्कर सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए उन्हें पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने से वंचित नहीं किया जा सकता।