29 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना के तहत निजी अस्पतालों के लंबित बिलों के भुगतान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगले दो सप्ताह के भीतर सभी लंबित बिलों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि सही पाए गए दावों का भुगतान शीघ्र किया जा सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिलों के सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा गठित एसआईटी की जांच से अलग और स्वतंत्र रहेगी। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक जितेंद्र सांजटा और विशेष सचिव (स्वास्थ्य) एवं सीईओ अश्विनी कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। अदालत ने अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद लंबित भुगतानों को लेकर सहमति बनते हुए कार्यवाही तेज करने के निर्देश दिए।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि लंबित बिलों के भुगतान के लिए फिलहाल करीब 17 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार को भी पूर्व आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को आयुष्मान भारत योजना के कार्यान्वयन से संबंधित समझौता ज्ञापन रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने को कहा गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही सितंबर 2024 से निजी अस्पतालों में हिमकेयर योजना का संचालन बंद हो चुका है, लेकिन डायलिसिस सेवाएं अभी भी जारी हैं। ऐसे में डायलिसिस से जुड़े सभी लंबित बिलों की तुरंत जांच कर उनका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को निर्धारित की गई है।