23 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद जिला ऊना प्रशासन और पुलिस विभाग को पीछे हटना पड़ा है। अदालत के आदेशों की अनुपालना करते हुए बुधवार को उन वाहनों को चिंतपूर्णी मंदिर न्यास को वापस सौंप दिया गया, जो मंदिर के दान से खरीदे गए थे और लंबे समय से प्रशासनिक उपयोग में लिए जा रहे थे।
अब इन वाहनों को चिंतपूर्णी मंदिर के यात्री निवास परिसर में सुरक्षित खड़ा कर दिया गया है।
यह मामला उस समय सामने आया जब हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी शामिल थे, ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मंदिर संपत्ति के दुरुपयोग पर कड़ी नाराजगी जताई।
याचिका में बताया गया था कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे से खरीदी गई एक इनोवा क्रिस्टा का उपयोग उपायुक्त ऊना कर रहे थे, जबकि मंदिर को दान में मिली बोलेरो गाड़ी पुलिस विभाग के पास थी। अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए स्पष्ट कहा कि धार्मिक दान का उपयोग केवल मंदिर और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए ही होना चाहिए।
कोर्ट ने प्रशासन को पांच दिनों के भीतर वाहनों को वापस करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद अब उन्हें मंदिर न्यास को लौटा दिया गया है।