18 अप्रैल: जिला स्तरीय बैसाखी मेले के दौरान इस वर्ष भी राजगढ़ शहर सेवा, श्रद्धा और भाईचारे की मिसाल बनकर उभरा। मेले में भंडारों की विशेष धूम देखने को मिली, जहां शहर के करीब आधा दर्जन स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। सैकड़ों लोग इन भंडारों में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए और सेवा-भाव से भरे माहौल का हिस्सा बने।
पूरे शहर का वातावरण धार्मिक रंग में रंगा नजर आया। गली-मोहल्लों में श्रद्धालु बढ़-चढ़कर सेवा कार्यों में भाग लेते दिखे। कहीं गर्म प्रसाद तो कहीं शीतल पेय, मीठा जल और आइसक्रीम वितरित की जा रही थी, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।
इस सेवा परंपरा की शुरुआत वर्ष 2001 में समाजसेवी कैलाश बल्याट द्वारा निचली बाजार में एक छोटे से भंडारे से की गई थी। समय के साथ यह पहल एक बड़े स्वरूप में बदल गई और आज यह मेले की प्रमुख पहचान बन चुकी है। वर्तमान में भी उनका भंडारा राजगढ़-सोलन मार्ग पर गुरुद्वारे के समीप लगातार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा हुआ है।
वहीं, वर्ष 2022 से समाजसेवी दीपक धीर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मेले के तीनों दिन भव्य भंडारे का आयोजन शुरू किया। उनके भंडारे में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिससे यह आयोजन मेले का खास आकर्षण बन गया है।
इस बार डाकघर के सामने सुद परिवार द्वारा भी एक दिन के लिए भंडारा लगाया गया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। इसके अलावा शहर के अन्य स्थानों पर भी कई श्रद्धालुओं द्वारा छोटे-छोटे भंडारों का आयोजन किया गया, जिससे सेवा और सहयोग की भावना और मजबूत हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भंडारा केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और मानवता का प्रतीक है। यही वजह है कि हर वर्ष अधिक से अधिक लोग इस पुण्य कार्य से जुड़ते जा रहे हैं और इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।