27 फरवरी: नाहन स्थित किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग से जुड़े एक पॉक्सो मामले में दोषी पाए गए एक किशोर को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधार का अवसर देने का निर्णय सुनाया है। प्रधान मजिस्ट्रेट विकास कपूर की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपी को एक वर्ष की परिवीक्षा पर उसकी मां की देखरेख में रहने का आदेश दिया है।
यह मामला 8 फरवरी 2022 को शिलाई थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार किशोर एक नाबालिग लड़की को अपने साथ ले गया था। पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 और 376 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत मामला दर्ज कर जांच के बाद आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 23 गवाह पेश किए गए।
बोर्ड के समक्ष आए तथ्यों के अनुसार घटना के समय लड़की की आयु 16 वर्ष तथा आरोपी की आयु 15 वर्ष थी। आदेश में उल्लेख किया गया कि संबंध सहमति से थे, हालांकि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ सहमति से बने संबंध भी अपराध की श्रेणी में आते हैं।
पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में बोर्ड ने आरोपी को अपहरण के आरोप से बरी कर दिया। सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट में उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया। बोर्ड ने माना कि आरोपी स्वयं किशोर है और सुधार की संभावना को ध्यान में रखते हुए उसे एक वर्ष के लिए अच्छे आचरण की शर्त पर मां की देखरेख में रिहा किया जाए।
साथ ही अधीक्षक-सह-परिवीक्षा अधिकारी को नियमित निगरानी और परामर्श सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद बोर्ड प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।