24 अक्तूबर: शरद पूर्णिमा को लेकर इस वर्ष लोगों में तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 25 अक्टूबर तो कुछ 26 अक्टूबर को यह पर्व मनाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में ज्योतिषाचार्य पंडित टेक चंद उपाध्याय ने पंचांग के आधार पर शरद पूर्णिमा की तिथि स्पष्ट की है। उनके अनुसार, शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर की रात मनाना उचित रहेगा।
पंडित टेक चंद उपाध्याय ने बताया कि पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। शरद पूर्णिमा का विशेष संबंध रात्रि से माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करने और उसकी रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। इसी मान्यता के आधार पर 25 अक्टूबर की रात शरद पूर्णिमा मनाना उचित रहेगा।
उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है। सनातन परंपरा में इस पर्व का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व का प्रभाव रहता है। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं और अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
पंडित टेक चंद उपाध्याय के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना और मां लक्ष्मी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और रात में चंद्रदेव को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्णिमा तिथि के आरंभ और समाप्त होने के समय को लेकर लोगों में भ्रम हो सकता है। हालांकि, पर्व की परंपरा और रात्रि में पूर्णिमा तिथि की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए 25 अक्टूबर की रात शरद पूर्णिमा मनाना उचित रहेगा।