10 अक्तूबर: हिमाचल प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में मंडी जिले के नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे मंडी सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन, तृतीयक स्तर के कैंसर केंद्र, लीनियर एक्सीलरेटर और सीटी सिम्युलेटर मशीन का शुभारंभ किया। इसके अलावा लगभग 51 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पीईटी स्कैन मशीन ब्लॉक की आधारशिला भी रखी।
मेडिकल कॉलेज में लगभग 23.53 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक 3 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित की गई है। यह मशीन गंभीर बीमारियों की पहचान और रेडियोलॉजिकल जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रेडियो डायग्नोसिस विभाग में सहायक आचार्य के तीन पद भी सृजित किए गए हैं।
कैंसर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए नेरचौक मेडिकल कॉलेज में तृतीयक स्तर का कैंसर केंद्र शुरू किया गया है। यहां 10 बिस्तरों वाला डे-केयर वार्ड स्थापित किया गया है, जिसमें मरीजों को कीमोथेरेपी सहित आवश्यक उपचार और देखभाल की सुविधाएं मिल रही हैं। कैंसर उपचार को और सुदृढ़ करने के लिए लगभग 21.05 करोड़ रुपये की लागत से रेडियोथेरेपी उपकरण स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त 9.10 करोड़ रुपये की लागत से 4डी सीटी सिम्युलेटर खरीदा गया है, जिसकी स्थापना का कार्य पूरा हो चुका है।
मेडिकल कॉलेज में लगभग 28.44 करोड़ रुपये की लागत से रोबोटिक सर्जरी मशीन स्थापित की गई है। मार्च 2026 में रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम शुरू होने के बाद अब तक 100 से अधिक सफल रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इस तकनीक से जटिल ऑपरेशन के दौरान मरीजों को अधिक सुरक्षित और बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने में मदद मिल रही है।
हृदय रोगियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए कैथ लैब स्थापित करने को सरकार ने 9.79 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। हृदय रोग विभाग में कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के बाद सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। मरीजों को नियमित ओपीडी सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ईडब्ल्यूएस एमबीबीएस छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 8.72 करोड़ रुपये की लागत वाले इस छात्रावास का शिलान्यास 14 अक्टूबर, 2025 को किया गया था। छात्रावास का पहला तल पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे तल का निर्माण कार्य जारी है।
नेरचौक मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 123 नर्सों की तैनाती की जा चुकी है। गंभीर मरीजों के उपचार की क्षमता बढ़ाने के लिए आईसीयू में 25 से 30 अतिरिक्त बेड स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश में इस वर्ष पीजी की 320 सीटें बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में एसआरशिप भी शुरू की गई है, जिससे चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
वर्तमान में नेरचौक मेडिकल कॉलेज में 23 विभाग कार्यशील हैं। इनमें मेडिसिन, निश्चेतन, बाल रोग, पल्मोनरी मेडिसिन, नेत्र रोग, हड्डी रोग, शल्य चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नाक-कान-गला, हृदय रोग, कैंसर चिकित्सा, रेडियोलॉजी, त्वचा विज्ञान, मनोरोग, फीजियोलॉजी, जैव रसायन, औषध विज्ञान, पैथोलॉजी, सूक्ष्मजीव विज्ञान, फॉरेंसिक मेडिसिन और सामुदायिक चिकित्सा सहित अन्य विभाग शामिल हैं।
प्रदेश सरकार का उद्देश्य नेरचौक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाना है। चिकित्सा उपकरणों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और उपचार सुविधाओं के विस्तार से मंडी सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अपने नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।