5 सितम्बर: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयास जमीनी स्तर पर सवालों के घेरे में हैं। बिलासपुर जिले में टीहरा टनल के समीप एनएचएआई की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया गोकुल धाम होने के बावजूद फोरलेन पर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी बनी हुई है। भगेड़ से टीहरा टनल की ओर जाने वाले मार्ग पर डिवाइडरों और सड़क के बीच बड़ी संख्या में पशु बैठे दिखाई दे रहे हैं, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के बीच दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
एनएचएआई ने गाबर कंपनी के साथ एमओयू के तहत गोकुल धाम विकसित किया था। इस केंद्र में एक साथ 100 से अधिक पशुओं को रखने की क्षमता है। परिसर में पशुओं के उपचार के लिए डिस्पेंसरी के साथ 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था भी की गई है। इसके बावजूद हाईवे पर बेसहारा पशुओं का घूमना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है।
रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर बैठे पशु दूर से दिखाई नहीं देते। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एनएचएआई ने पहले फोरलेन पर घूमने वाले पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट और सींगों पर रेडियम टेप लगाने की बात कही थी, लेकिन फिलहाल सड़क पर मौजूद पशुओं में ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया कि गोकुल धाम में मुख्य रूप से बीमार और वाहन की टक्कर से घायल पशुओं को रखा जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र की क्षमता बढ़ाने के लिए वन विभाग की भूमि पर अतिरिक्त शेड बनाने को लेकर उपायुक्त बिलासपुर से चर्चा की गई है। उन्होंने संबंधित टीम को मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। गोकुल धाम में जगह उपलब्ध होने पर फोरलेन पर मौजूद बेसहारा पशुओं को वहां शिफ्ट किया जाएगा।