6,048 मीटर की अज्ञात चोटी पर पहली बार फहराया तिरंगा, गिमनर सिंह ने रचा विश्व रिकॉर्ड

28 अगस्त: लाहौल-स्पीति की 6,048 मीटर ऊंची अज्ञात और अछूती चोटी पर पहली बार सफल चढ़ाई कर 10 सदस्यीय पर्वतारोही दल ने तिरंगा फहराकर हिमाचल प्रदेश के साहसिक खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। इस ऐतिहासिक अभियान के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं खेल संस्थान मनाली के पैराग्लाइडिंग अनुदेशक गिमनर सिंह ने इसी शिखर से पैराग्लाइडिंग कर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया। दावा किया गया है कि इतनी ऊंचाई से सफल पैराग्लाइडिंग करने वाले वह दुनिया के पहले व्यक्ति हैं।

इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन के प्रस्तावित इस अभियान की शुरुआत 22 अगस्त को हुई थी। बेहद कम तापमान, ऑक्सीजन की कमी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पर्वतारोहियों ने महज पांच दिनों में अभियान पूरा कर लिया। 26 अगस्त को दल ने 6,048 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर वहां तिरंगा फहराया।

अभियान के लीडर देशराज ने बताया कि फिलहाल इस चोटी का कोई आधिकारिक नाम दर्ज नहीं है। पर्वतारोहण के नियमों के अनुसार किसी अज्ञात या अछूती चोटी पर पहली बार सफल चढ़ाई करने वाले दल या व्यक्ति को उसके नामकरण का प्रस्ताव रखने का अधिकार होता है। जल्द ही चोटी के आधिकारिक नामकरण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

इस अभियान में गिमनर सिंह के अलावा लक्ष्य दत्त, राम कुमार, अंकित सिंह, रणजीत ठाकुर, गौरव, सौरव और केला देवी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। कठिन परिस्थितियों में सभी सदस्यों ने बेहतर तालमेल और साहस का परिचय देते हुए अभियान को सफल बनाया।

गिमनर सिंह ने बताया कि लाहौल क्षेत्र में 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली कई चोटियां अभी भी अछूती हैं। क्षेत्र में पहले से 6,100 मीटर ऊंची ऊनम पीक मौजूद है और अब 6,048 मीटर की इस नई चोटी के सामने आने से हिमाचल में पर्वतारोहण के नए अवसर पैदा होंगे। उनका कहना है कि इससे पहले ऐसी ऊंची चोटियों पर चढ़ाई के लिए पर्वतारोहियों को लेह-लद्दाख का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब हिमाचल में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्वतारोहियों और पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए पर्यटन एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं को साहसिक खेलों और पर्वतारोहण से जोड़कर उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना भी था। दल के सदस्यों ने कहा कि पर्वतारोहण जैसी गतिविधियां युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता भी विकसित करती हैं। युवाओं को रचनात्मक और साहसिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें नशे के खिलाफ सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।

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