15 अगस्त, तरसेम जरयाल : धौलाधार–विपाशा शोध धारा सोसायटी द्वारा धर्मशाला महाविद्यालय के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुक्रवार को महाविद्यालय परिसर में देवदार के पौधे रोपे गए। पौधों की सुरक्षा के लिए उनके साथ ट्री गार्ड भी लगाए गए।
इस अवसर पर सोसायटी की सदस्य डॉ. दीपिका ठाकुर ने कहा कि शोध, प्रकृति संरक्षण और सनातन संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सनातन परंपरा में प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है। धर्मशाला महाविद्यालय के शताब्दी वर्ष पर पौधरोपण इसी पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।
कार्यक्रम में सोसायटी के सदस्य डॉ. अमित कटोच, नरेंद्र जमवाल, डॉ. विकास नड्डा, डॉ. शैल्ली, डॉ. आरती चंदेल, डॉ. अखिल और डॉ. संजीव सहित महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की।
सोसायटी के सदस्यों ने कहा कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर किया गया यह पौधरोपण शोध, सनातन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेगी और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देगी।