3 अगस्त: जिला हमीरपुर को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों के उपचार और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। जिला टीबी फोरम की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीसी अभिषेक गर्ग ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और आशा वर्कर्स को टीबी मरीजों के इलाज की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अभिषेक गर्ग ने कहा कि टीबी मरीजों को नियमित रूप से दवाइयां लेना सुनिश्चित किया जाए। आशा वर्कर्स अपनी उपस्थिति में मरीजों को दवाई खिलाएं, जबकि डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी भी मरीजों के संपर्क में रहकर उनके उपचार और स्वास्थ्य की नियमित जानकारी लेते रहें। उन्होंने कहा कि मरीजों का उपचार बीच में न छूटे, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को विशेष निगरानी रखनी होगी।
उन्होंने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की जल्द पहचान के लिए चार नई हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हुई हैं। इससे फील्ड स्तर पर टीबी की जांच को गति मिलेगी और संभावित मरीजों की पहचान कर समय पर उपचार शुरू किया जा सकेगा।
एडीसी ने कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है और मरीजों को सरकार की ओर से मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं। समय पर उपचार शुरू करने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित दवाइयां लेने से मरीज स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव या लापरवाही के कारण कुछ मरीज उपचार बीच में छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है।
बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष अब तक हमीरपुर जिले में 523 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है और सभी का उपचार शुरू कर दिया गया है। वहीं, इस वर्ष टीबी से सात मरीजों की मृत्यु हुई है। इनमें अधिकांश मरीज अन्य गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित थे। एडीसी ने कहा कि टीबी से होने वाली मौतों को शून्य तक लाने के लिए मरीजों की लगातार निगरानी के साथ-साथ आम लोगों में बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
बैठक में टीबी से पूरी तरह स्वस्थ हो चुके मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए और उपचार के दौरान स्वास्थ्य विभाग से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सीएमओ डॉ. अजय अत्री, जिला टीबी नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा, विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसल्टेंट डॉ. निकेत सहित अन्य चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के बाद एडीसी ने बरसात के मौसम में जल जनित बीमारियों और मक्खी-मच्छर, बैक्टीरिया, वायरस व परजीवियों से फैलने वाले रोगों की रोकथाम को लेकर भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में इन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए पेयजल स्रोतों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को लोगों को स्वच्छता और रोगों से बचाव के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए। किसी भी क्षेत्र में बीमारी फैलने की सूचना मिलने पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने को भी कहा गया।