30 जुलाई: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले के लिप्पा गांव में मलबे के बहाव और जलभराव की गंभीर स्थिति का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को राहत एवं सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रभावित क्षेत्र में तत्काल अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए।
अदालत ने निर्देश दिया कि पानी के जमाव को रोकने और प्रभावित पुल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मौके पर दो अतिरिक्त भारी मशीनें तुरंत तैनात की जाएं। हाल ही में 9 और 10 जुलाई को लिप्पा क्षेत्र में दोबारा मलबे का बहाव होने से दोनों नदियों के संगम और मुख्य पुल के पास भारी मात्रा में गाद जमा हो गई थी, जिससे हालात और गंभीर हो गए।
जिला प्रशासन ने नदी किनारे स्थित 10 मकानों को अत्यधिक संवेदनशील घोषित करते हुए वहां रहने वाले लोगों के लिए लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने 25 फरवरी 2026 को ही मानसून से पहले मलबे की संभावित समस्या से निपटने के लिए 12 महत्वपूर्ण सिफारिशें जारी की थीं, लेकिन प्रशासन द्वारा समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें राहत और सुरक्षा कार्यों की प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाएगी।