21 अगस्त : हिमाचल प्रदेश सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वनस्पति तेल और फैट से तैयार एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर को असली पनीर के नाम पर बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। स्वास्थ्य सुरक्षा एवं नियमन निदेशालय ने गुरुवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और सैंपलिंग के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे पनीर की बिक्री और परिवहन का मामला सामने आया था, जिसमें दूध के फैट की जगह गैर-दुग्ध फैट का इस्तेमाल किया जा रहा था। विभाग ने ऐसे उत्पादों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया। इसके बाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।
अधिसूचना के अनुसार कोई भी व्यक्ति या खाद्य कारोबारकर्ता एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर को असली पनीर के रूप में हिमाचल में उत्पादित, पैक, भंडारित, वितरित या बेच नहीं सकेगा। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और क्लाउड किचन को भी अपने मेन्यू या बिल में पनीर दर्ज करने पर वास्तविक डेयरी पनीर का ही इस्तेमाल करना होगा।
पनीर कारोबारियों के लिए खरीद बिल, इनवॉइस और बैच से संबंधित पूरी जानकारी रखना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि निरीक्षण के दौरान उत्पाद के स्रोत का पता लगाया जा सके।
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें खाद्य सामग्री जब्त करने, उसे नष्ट करने और जुर्माना लगाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा आयुक्त एवं स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार द्वारा जारी यह आदेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से एक वर्ष तक पूरे प्रदेश में प्रभावी रहेगा।