16 अक्तूबर: ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयूजीकेवाई) के तहत वीरवार को जिला परिषद सभागार धर्मशाला में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, कांगड़ा के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर की अध्यक्षता भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक पवन नैय्यर ने की। शिविर में ग्रामीण युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों और कौशल प्रशिक्षण प्रदाता एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पवन नैय्यर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक तंगी और रोजगार के सीमित अवसरों की चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रशिक्षण देना जरूरी है। डीडीयूजीकेवाई योजना ग्रामीण गरीब परिवारों के युवाओं को उनकी रुचि और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने बताया कि सितंबर 2014 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक देशभर में 18.47 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 12.43 लाख से अधिक युवा रोजगार प्राप्त कर चुके हैं।
पवन नैय्यर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में योजना के प्रथम चरण के तहत पंजीकृत 22,000 युवाओं में से 20,946 ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और 16,413 युवाओं को रोजगार मिला। इस उपलब्धि के साथ हिमाचल प्रदेश देशभर में पांचवें स्थान पर रहा है।
उन्होंने कहा कि योजना से लाभान्वित युवाओं के अनुभव और उनके आत्मविश्वास में आया बदलाव इसके सकारात्मक परिणामों को दर्शाता है। उन्होंने पंचायत स्तर तक योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र ग्रामीण युवा कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार हासिल कर सकें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकें।
अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में योजना की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने पात्र ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे बेरोजगारी कम करने, युवाओं की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
जिला विकास अधिकारी (ग्रामीण विकास) अभिनीत कात्यायन ने योजना के तहत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटी सेवाओं, वस्त्र एवं परिधान, खुदरा व्यापार, पर्यटन एवं आतिथ्य सत्कार, स्वास्थ्य सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, निर्माण कार्य, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं तथा ब्यूटी एवं वेलनेस सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि योजना के दूसरे चरण में प्रदेश के दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में पंचकर्मा को भी शामिल किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने और नियमित आय के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से जल्द ही टोल फ्री नंबर भी जारी किया जाएगा।
अभिनीत कात्यायन ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ संचार कौशल, कार्यस्थल पर व्यवहार और पेशेवर कार्यप्रणाली की जानकारी भी दी जाती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पात्र अभ्यर्थियों को रोजगार प्राप्त करने में सहायता प्रदान की जाती है।
शिविर में प्रतिभागियों को योजना की पात्रता, शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण प्रक्रिया, रोजगार के अवसरों और कौशल प्रशिक्षण प्रदाता एजेंसियों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर सीईओ, एचपीएसआरएलएम सुरेंद्र मोहन और डिप्टी सीईओ हितेंद्र ने भी अपने विचार रखे।