27 अक्तूबर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद योजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इसके तहत सेना के लिए आधुनिक वाहन, तोप प्रणाली, हेलिकॉप्टर, वायु रक्षा प्रणाली और निगरानी ड्रोन सहित कई प्रकार के उपकरण खरीदने का रास्ता साफ हुआ है। इन उपकरणों से दुर्गम क्षेत्रों में सेना की आवाजाही, निगरानी, हवाई खतरों से सुरक्षा और सैन्य अभियानों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने विभिन्न रक्षा बलों की पूंजीगत खरीद से जुड़े प्रस्तावों को लगभग 2,12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर स्वीकृति की आवश्यकता (एओएन) प्रदान की है। यह खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दी जाने वाली सैद्धांतिक मंजूरी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी उपकरणों की खरीद और आपूर्ति को अंतिम मंजूरी मिल गई है। इसके बाद संबंधित प्रस्तावों पर निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय सेना के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। ये वाहन पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों की आवाजाही तथा सैन्य सामान पहुंचाने में उपयोगी होंगे। इसके अलावा स्वचालित ट्रैक वाली तोप प्रणाली भी खरीदी जाएगी, जिससे मशीनीकृत सैन्य टुकड़ियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने और युद्ध के दौरान प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
सेना के लिए गन शॉट रिस्पांस सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली गोलीबारी से संबंधित जानकारी जुटाने और उसके स्रोत का पता लगाने में मदद करेगी, जिससे सैनिकों को खतरे का आकलन करने और उचित जवाबी कार्रवाई के लिए बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
रक्षा खरीद योजना में हल्के बहुउद्देशीय हेलिकॉप्टर, बेहद कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और प्लेटफार्म आधारित ड्रोन रोधी प्रणाली भी शामिल हैं। इसके साथ ही लंबी दूरी तक काम करने वाले मानव रहित विमान, निगरानी करने वाले यूएवी, एकीकृत निगरानी एवं हमला प्रणाली और लंबी दूरी की कामिकाजे ड्रोन प्रणाली की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इन आधुनिक उपकरणों से सशस्त्र बलों की निगरानी, हवाई सुरक्षा और अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
हल्के बहुउद्देशीय हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना, दोनों के लिए प्रस्तावित हैं। इनका इस्तेमाल टोह लेने, निगरानी करने और विभिन्न सैन्य अभियानों में किया जा सकेगा। इसके अलावा सैनिकों की खोज एवं बचाव, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कार्यों में भी ये हेलिकॉप्टर उपयोगी साबित होंगे। इस रक्षा खरीद योजना का उद्देश्य तीनों सेनाओं को आधुनिक सैन्य जरूरतों के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।