18 जून : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दोनों देशों ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने तेहरान में दस्तखत किए। दोनों नेताओं की मंजूरी के बाद यह समझौता गुरुवार सुबह से प्रभावी हो गया।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार समझौते में ईरान के परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता शामिल है। साथ ही देश के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के विशेष कोष का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस कोष में अमेरिका का योगदान अनिवार्य नहीं होगा।
करीब चार महीने से जारी क्षेत्रीय तनाव के बाद हुए इस समझौते को ट्रंप प्रशासन ने ‘प्रदर्शन आधारित’ बताया है। इसके तहत ईरान को समझौते से मिलने वाले लाभ तभी प्राप्त होंगे, जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह पालन करेगा। समझौते में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के साथ-साथ लेबनान में संघर्ष खत्म करने की दिशा में भी प्रयास करने की बात कही गई है।
समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया पर समझौते से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा और वैश्विक बाजार को राहत मिलेगी।