5 सितंबर: मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत बीपीएल यानी पात्र परिवारों के चयन और सत्यापन की प्रक्रिया को प्रशासन ने तेज कर दिया है। इस संबंध में एसडीएम इंदौरा डॉ. सुरेंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में पंचायत प्रधानों और पंचायत सचिवों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में पात्र परिवारों के चयन, सूची के सत्यापन तथा सरकार द्वारा निर्धारित समावेशन और बहिष्करण मानदंडों पर विस्तार से चर्चा की गई।
एसडीएम ने बताया कि आठ चरणों में अब तक 1334 लोग पात्र पाए गए हैं। अब नौवें चरण में सूची का बारीकी से सत्यापन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और अपात्र परिवार को योजना का लाभ न मिले।
पात्रता की जांच के लिए पटवारी, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी संबंधित परिवार की वास्तविक स्थिति की जांच कर सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर पात्रता सुनिश्चित करेगी।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवार, केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों वाले परिवार, महिला मुखिया वाले कुछ परिवार, 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवार, भूमिहीन परिवार तथा मनरेगा में पिछले वित्तीय वर्ष में कम से कम एक दिन काम करने वाले वयस्क सदस्य वाले परिवार निर्धारित शर्तों के तहत पात्र हो सकते हैं। गंभीर बीमारी या दुर्घटना के कारण स्थायी रूप से अक्षम अथवा बिस्तर पर पड़े कमाने वाले सदस्य वाले परिवार भी पात्रता के दायरे में आ सकते हैं।
वहीं, जिन परिवारों का कोई सदस्य आयकरदाता है, जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक है, जिनके पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है या जिनका कोई सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी अथवा निजी सेवा में है, उन्हें बहिष्करण मानदंड के तहत योजना से बाहर रखा जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केवल समावेशन की किसी एक शर्त को पूरा करना अंतिम पात्रता नहीं माना जाएगा। पहले परिवार को पात्रता के लिए चिन्हित किया जाएगा और इसके बाद बहिष्करण मानदंडों की जांच होगी। इन शर्तों में न आने पर ही परिवार को अंतिम रूप से पात्र माना जाएगा।
एसडीएम डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों से नौवें चरण में सत्यापन का कार्य पूरी गंभीरता और पारदर्शिता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई पात्र परिवार पिछली प्रक्रिया में सूची में शामिल होने से रह गया है तो उसे नियमानुसार जोड़ा जाए। वहीं, सूची में शामिल अपात्र लोगों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। पंचायत स्तर पर होने वाला सत्यापन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि कोई पात्र परिवार लाभ से वंचित न रहे और अपात्र व्यक्ति योजना का लाभ न उठा सके।