HIMUDA CEO की नियुक्ति रद्द, हाई कोर्ट ने नए सिरे से चयन के दिए आदेश

5 सितंबर: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) के CEO-सह-सचिव पद पर सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। अदालत ने माना कि लागू सेवा नियमों के तहत वशिष्ठ इस पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे।

न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ ने HIMUDA की सीनियर चीफ इंजीनियर अंजोरी कपूर की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कपूर ने वशिष्ठ के पद को अपग्रेड करने और इसके बाद उन्हें CEO-सह-सचिव नियुक्त किए जाने को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लागू भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार इस पद के लिए नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सक्षम अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक बुलाने को कहा है।

कपूर को दिसंबर 2022 में चीफ इंजीनियर पद पर पदोन्नत किया गया था। उन्होंने सरकार के फरवरी 2023 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत वशिष्ठ के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर पद को व्यक्तिगत उपाय के आधार पर चीफ इंजीनियर पद में अपग्रेड किया गया था।

याचिका में कपूर की ओर से तर्क दिया गया कि मई 2025 में वशिष्ठ की CEO-सह-सचिव पद पर नियुक्ति 2012 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुरूप नहीं थी। उनका कहना था कि वशिष्ठ के पास इस शीर्ष पद पर विचार किए जाने के लिए चीफ इंजीनियर का नियमित पद नहीं था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एक चीफ इंजीनियर पद का नाम बदलकर एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रैटेजी) कर दिया और कपूर को उस पद पर नियुक्त कर दिया, जबकि वशिष्ठ CEO-सह-सचिव पद पर बने रहे।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी पद को केवल व्यक्तिगत उपाय के तौर पर अपग्रेड करने से सेवा नियमों के तहत नया नियमित कैडर पद नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने माना कि वशिष्ठ का चीफ इंजीनियर पद पर प्रमोशन नियमित कैडर व्यवस्था के अनुरूप नहीं था और इसलिए वे CEO-सह-सचिव पद पर आगे पदोन्नति के लिए पात्र नहीं थे।

अदालत ने यह भी कहा कि कार्यकारी आदेश वैधानिक सेवा नियमों से ऊपर नहीं हो सकते। कैडर में बदलाव या नए पदों का सृजन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने 27 मई 2025 की उस अधिसूचना को भी रद्द कर दिया, जिसके माध्यम से वशिष्ठ को CEO-सह-सचिव और कपूर को एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रैटेजी) नियुक्त किया गया था।

अदालत ने माना कि CEO-सह-सचिव पद पर नियुक्ति के लिए निष्पक्ष रूप से विचार किए जाने का कपूर का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत संरक्षित है और इस मामले में उनका यह अधिकार प्रभावित हुआ।

हालांकि, हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि वशिष्ठ को CEO-सह-सचिव के रूप में कार्यकाल के दौरान प्राप्त आर्थिक लाभ की उनसे वसूली नहीं की जाएगी। अब राज्य सरकार को लागू सेवा नियमों के तहत कपूर सहित सभी पात्र उम्मीदवारों के बीच से CEO-सह-सचिव पद के लिए नए सिरे से चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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