परवाणू में हिमुडा से पानी का कनेक्शन लेने के लिए जल शक्ति विभाग से लेनी पड़ रही एनओसी

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आवाज ए हिमाचल 

यशपाल ठाकुर, परवाणू।

औद्योगिक क्षेत्र परवाणू में लोगो को हिमुडा से पानी के कनेक्शन के लिए जल शक्ति विभाग की एनओसी लेनी पड़ रही है। इसे बेवजह की औपचारिकता कहा जा सकता है, क्यूंकि परवाणू में पेयजल की सप्लाई हिमुडा द्वारा की जा रही है, जल शक्ति विभाग का परवाणू की पेयजल सप्लाई से कोई लेना देना नहीं है। उस पर आलम यह है की पानी के कनेक्शन की फाइल अप्रूवल के लिए शिमला भेजी जाती, इसमें पैसे व समय दोनों का नुकसान हो रहा है। ऐसा केवल निजी जमीन मालिको के साथ हो रहा है। हिमुडा द्वारा अलॉट जमीन अथवा प्लाट पर ऐसी कोई फॉर्मेलिटी नहीं है। लोगो का कहना है की पानी के कनेक्शन से जुडी जो भी औपचारिकताए है उन्हें हिमुडा के परवाणू स्थित कार्यालय में ही निपटाया जाए।

गौरतलब है की परवाणू में पानी की सप्लाई करने वाली एजेंसी हिमुडा यहाँ पर रह रहे लोगों को पानी का नया कनेक्शन देने से पहले जल शक्ति विभाग की एनओसी मांगता है, वो भी तब जब की पुरे परवाणू में पानी की सप्लाई केवल हिमुडा के ही पास है। जल शक्ति विभाग का परवाणू की पेयजल सप्लाई या नये कनेक्शन लगाने में कोई हस्तक्षेप भी नहीं है, फिर भी हिमुडा विभाग निजी ज़मीन पर नये कनेक्शन लगाने के लिए जल शक्ति विभाग की एनओसी मांगता है। यह लोगों को मात्र परेशान करने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया से यहाँ के निवासियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह भी बता दे की लोगो द्वारा सभी औपचारिकताए पूरी करने के बाद कनेक्शन से सम्बंधित फ़ाइल को शिमला चीफ इंजिनियर के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग एक से दो महीने और कभी कभी ज्यादा समय भी लग जाता है। इतने समय के बाद भी कोई ऑब्जेक्शन लगने पर फ़ाइल फिर वापिस आ जाती है। लोगों का कहना है की यहाँ की भौगोलिक परिस्थिति व दिक्कतें स्थानीय विभाग से बेहतर कोई नहीं जानता। वह जल्द मौक़े का भी निरिक्षण कर सकता है। इस पुरे केस में फ़ाइल शिमला जाने के बजाए अधिशासी अभियंता परवाणू को यह पॉवर दे जानी चाहिए।

इस बारे में हिमुडा के अधिशाषी अभियंता गिरीश शर्मा का कहना है की यह एक विभागीय प्रक्रिया है और उसे फॉलो करना हमारा कार्य है। गिरीश शर्मा ने कहा की हिमुडा द्वारा अलॉट किए गए प्लाट पर यह प्रक्रिया फॉलो नहीं होती है। जो निजी भूमि मालिक है, उन्हें इस प्रक्रिया से गुज़रना ही पड़ता है, चाहे उसके पास से हिमुडा की लाइन ही क्यों ना जा रही हो। उन्होंने कहा की यदि परवाणू में ही हिमुडा के किसी उच्च अधिकारी को यह पॉवर दे दी जाए तो लोगों की परेशानी काफी हद तक दूर हो सकती है, लेकिन यह निर्णय हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

 

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