22 अप्रैल: उप तहसील पझौता के मानवा गांव स्थित प्राचीन शिरगुल देवता मंदिर में पहली बार बनारसी शैली की भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया। काशी (वाराणसी) से पधारे विद्वान ब्राह्मणों द्वारा संपन्न इस विशेष अनुष्ठान ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
इस कार्यक्रम की पहल स्थानीय निवासी अनुराग शर्मा द्वारा की गई, जिसके चलते यह आयोजन क्षेत्र के लिए एक यादगार अवसर बन गया। कार्यक्रम की शुरुआत सायंकाल पूज्य गुरुदेव वेदांत आचार्य रोशन लाल शर्मा के स्वागत के साथ हुई। इसके पश्चात विधिपूर्वक शिरगुल महाराज की पूजा-अर्चना की गई।
काशी से आए विद्वानों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पारंपरिक बनारसी शैली में आरती प्रस्तुत की, जिससे पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी और घंटियों की मधुर ध्वनि से गूंज उठा। इस दिव्य वातावरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर गुरुदेव ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए विनम्रता, पवित्रता और संयम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को तन-मन की शुद्धता बनाए रखने का संदेश दिया।
आरती के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन रहे। अगले दिन शिरगुल महाराज की पवित्र जातर सोलन स्थित सुमित्रानंदन निकेतन पहुंची, जहां पालकी का भव्य स्वागत और महाआरती का आयोजन किया गया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई पहचान देने वाला साबित हुआ। अंत में आयोजन के संयोजक अनुराग शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।