29 अगस्त, तरसेम जरयाल: राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में हिमालयी सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक परंपराओं के संरक्षण को लेकर ‘हिमालयन सांस्कृतिक विरासत संरक्षण एवं विकास’ विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में यूथ डेवलपमेंट सेंटर द्वारा महाविद्यालय के सहयोग से किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान महाविद्यालय के संगीत विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। डॉ. आरती चंदेल ने मुख्य अतिथि का स्वागत एवं परिचय करवाया।
विनय धीमान ने कहा कि हिमालयी लोक कलाएं क्षेत्र के समाज, जीवनशैली, प्रकृति, आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में इन कलाओं और परंपराओं को संरक्षित करना जरूरी है। युवाओं को लोक संगीत, लोक नृत्य, पारंपरिक शिल्प और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने चंबा, कांगड़ा और भरमौर सहित हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट संस्कृति प्रदेश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में युवाओं की भूमिका अहम है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश पठानिया ने कार्यशाला के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्रालय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के शताब्दी वर्ष में इस तरह की कार्यशाला का आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी महत्व देने का आह्वान किया।
कार्यशाला के आयोजन में रोवर-रेंजर, एनएसएस, टूर एंड ट्रैवल, यूथ एवं वोकेशनल स्टडीज तथा हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म विभाग के विद्यार्थियों ने सहयोग दिया।
कार्यशाला में प्रख्यात लोक कलाकार एवं प्रशिक्षक जितेन्द्र कुमार सहित अन्य विशेषज्ञ विद्यार्थियों को हिमालयी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक लोक कलाओं से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक जानकारी देंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।