17 जुलाई: हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने नई इलेक्ट्रिक बसों की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि निर्धारित सभी तकनीकी मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही नई बसों को यात्रियों की सेवा में लगाया जाएगा। यह निर्णय गुरुवार को उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आयोजित एचआरटीसी निदेशक मंडल की 163वीं बैठक में लिया गया।
बैठक में निगम के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, अतिरिक्त सचिव परिवहन ओंकार चंद शर्मा, प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल सहित निदेशक मंडल के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश सरकार चरणबद्ध तरीके से 297 नई इलेक्ट्रिक बसों को एचआरटीसी के बेड़े में शामिल कर रही है।
पहले चरण में 150 इलेक्ट्रिक बसें उन नौ डिपो को आवंटित की जाएंगी, जहां चार्जिंग स्टेशन पहले से स्थापित हैं। हालांकि इन बसों को अंतिम तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद ही संचालन में लाया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश में चार नए ई-डिपो भी जल्द शुरू किए जाएंगे। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इलेक्ट्रिक बसों को जनता की सेवा के लिए समर्पित किया जाएगा।
बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने एचआरटीसी बसों में टायरों की कमी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी बस का संचालन टायर, स्पेयर पार्ट्स या अन्य जरूरी सामग्री की कमी के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तैयार रखने के भी निर्देश दिए।
निदेशक मंडल ने पहले से संचालित इलेक्ट्रिक बसों के लिए 50 नई बैटरियां खरीदने को मंजूरी दी। इसके साथ संबंधित कंपनी के साथ वार्षिक अनुरक्षण अनुबंध (एएमसी) भी किया जाएगा, जिससे बैटरियों और अन्य तकनीकी रखरखाव की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। इससे पुरानी इलेक्ट्रिक बसों की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।
बैठक में एचआरटीसी बसों के लिए टायर और लुब्रिकेंट की खरीद को भी स्वीकृति दी गई। तीन बार टेंडर प्रक्रिया के बावजूद हर बार केवल एक कंपनी के बोली लगाने पर आवश्यक आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए एकल निविदा के आधार पर खरीद को मंजूरी दी गई, ताकि बसों का संचालन निर्बाध रूप से जारी रह सके। नई इलेक्ट्रिक बसों को पूरी गुणवत्ता जांच के बाद ही सड़कों पर उतारा जाएगा, जिससे यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और बेहतर परिवहन सेवा मिल सके।