13 अक्तूबर, तरसेम जरयाल : राजकीय महाविद्यालय ढलियारा में अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के उपलक्ष्य में आपदा प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और कर्मचारियों को भूकंप, आग तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं सुरक्षा के उपायों की जानकारी देना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुशील शर्मा ने की।
कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य डॉ. कपिल सूद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित होना आवश्यक है। उन्होंने आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय सूझबूझ और सावधानी से काम लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
होमगार्ड एवं अग्निशमन विभाग देहरा, ददासिबा तथा 9/6 (आर) कंपनी देहरा की टीम ने महाविद्यालय परिसर में मॉक ड्रिल के माध्यम से बचाव एवं राहत कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। टीम में देहरा के प्रभारी विनोद कुमार, अग्निशमन केंद्र देहरा के एलएफएम टेक चंद और एलएफएम सुजान सिंह, जवाली के पुलिस कांस्टेबल दीप कुमार तथा एलएफएम मनोज कुमार शामिल रहे।
मॉक ड्रिल के दौरान टीम ने भूकंप और आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित रहने, घायलों तक पहुंचने, उन्हें प्राथमिक सहायता देने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के तरीके समझाए। साथ ही, दूसरों की मदद करते समय अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
भूकंप से बचाव के लिए विद्यार्थियों और कर्मचारियों को ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड’ तकनीक का अभ्यास करवाया गया। वहीं, अग्निशमन विभाग की टीम ने आग लगने के प्रमुख कारणों, अग्निशमन उपकरणों के इस्तेमाल और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को संकट के समय सतर्क रहने और सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया गया।
इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के 1021 विद्यार्थियों, 35 शिक्षकों और चार गैर-शिक्षण कर्मचारियों सहित कुल 1060 लोगों ने भाग लिया।
इस अवसर पर प्रो. पूजा राजपूत ने कहा कि आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जागरूकता, पूर्व तैयारी और सामूहिक सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए होमगार्ड एवं अग्निशमन विभाग की टीम, आयोजकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को संदेश दिया गया कि आपदा प्रबंधन प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से न केवल स्वयं की सुरक्षा करने, बल्कि संकट के समय दूसरों की सहायता करने की क्षमता भी विकसित होती है।