10 मई: बिलासपुर में जिला परिषद चुनाव इस बार राजनीतिक दलों के लिए कड़ी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान, गुटबाजी और दावेदारों की लंबी कतार ने नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी को हर वार्ड में सियासी समीकरण साधने के लिए लगातार मंथन करना पड़ रहा है। वहीं भाजपा ने अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए हैं, लेकिन अंदरूनी विरोध और संभावित मितरघात को लेकर चिंता बनी हुई है।
11 मई को नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आते ही कांग्रेस में टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। कई वार्डों में एक से अधिक नेताओं ने दावेदारी पेश कर रखी है, जिससे सहमति बनाना आसान नहीं हो रहा। जुखाला, बरमाणा और बडग़ांव वार्डों में सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। यहां कई मजबूत चेहरे टिकट की दौड़ में हैं और हर नेता अपने प्रभाव व संगठनात्मक पकड़ के दम पर आगे निकलने की कोशिश कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार कई वार्डों में अंदरखाते लॉबिंग और साइलेंट कैंपेन भी तेज हो गया है। शनिवार को लंबे विचार-विमर्श के बाद घुमारवीं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने गाहर वार्ड से संतोष कुमारी और कोट वार्ड से विद्या देवी के नाम पर सहमति बनाई।
पार्टी नेताओं के बीच रविवार को भी बैठकों का दौर जारी रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि बाकी वार्डों के उम्मीदवारों के नाम भी देर शाम तक तय हो सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस टिकट वितरण के बाद पार्टी में एकजुटता बनाए रखने में कितनी सफल रहती है, क्योंकि इस बार मुकाबला केवल विपक्ष से नहीं बल्कि आंतरिक समीकरणों से भी माना जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व इस बार टिकट वितरण में जल्दबाजी के मूड में नहीं है। पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारना चाहती है जिनकी गांव स्तर तक मजबूत पकड़ हो और जो सीधे मतदाताओं से जुड़ाव रखते हों।