8 सितंबर: युवा खेल सेवाएं एवं आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा ने कहा कि जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) के सहयोग से हिमाचल प्रदेश में वानिकी क्षेत्र में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जायका परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
खन्यारा स्थित एल्पाइन होटल में जायका परियोजना के अनुभव साझा करने के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर गोमा ने कहा कि प्रदेश के सात जिलों के 920 स्वयं सहायता समूह जायका परियोजना से जुड़े हैं। इन समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को हर्बल उत्पाद, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि ग्राम वन विकास समितियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वन संरक्षण को स्थानीय आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जायका के सहयोग से ग्रामीणों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि उनकी कार्यक्षमता और आय के साधनों में वृद्धि हो सके।
गोमा ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में हल्दी, दूध, गेहूं सहित अन्य कृषि उत्पादों के न्यूनतम मूल्य निर्धारित किए गए हैं, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सके।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की बंजर और क्षीण वन भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। सरकार ने राज्य के हरित आवरण को 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जायका परियोजना के माध्यम से स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ईको-टूरिज्म साइट्स भी विकसित की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
इससे पहले मुख्य अरण्यपाल संजय सूद ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और हिमाचल में जायका परियोजना की उपलब्धियों तथा भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी। पंजाब के मुख्य अरण्यपाल धर्मेंद्र ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला में मेघालय और तमिलनाडु के प्रतिनिधियों के अलावा वन विभाग के अधिकारियों तथा जायका परियोजना के लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।