27 अप्रैल: डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं साइबर ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। हाल के समय में ऑनलाइन बैटिंग एक बड़ा साइबर जाल बनकर उभरा है, जिससे कई लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
हिमाचल पुलिस ने लोगों को चेतावनी देते हुए बताया है कि ऑनलाइन बैटिंग कोई असली कमाई का जरिया नहीं, बल्कि ठगों की सुनियोजित चाल है। अपराधी पहले यूजर्स को छोटे-छोटे मुनाफे का लालच देकर फंसाते हैं। शुरुआत में जानबूझकर उन्हें जिताया जाता है और कई बार शुरुआती रकम निकालने की अनुमति भी दी जाती है, ताकि भरोसा बनाया जा सके।
लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति बड़ी राशि निवेश करता है, ठग अचानक उसका अकाउंट ब्लॉक कर देते हैं या पूरा प्लेटफॉर्म ही गायब कर देते हैं।
यह ठगी केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है। “गारंटीड जीत”, “डबल पैसा” और “घर बैठे कमाई” जैसे आकर्षक ऑफर देकर लोगों को भ्रमित किया जाता है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी वेबसाइट्स के जरिए इन जालों को तेजी से फैलाया जाता है। कई प्लेटफॉर्म इतने प्रोफेशनल दिखते हैं कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें। बिना भरोसेमंद स्रोत के कोई ऐप डाउनलोड न करें और अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
ऐसे मामलों में लत का खतरा भी बढ़ रहा है। शुरुआत में मिली जीत के बाद लोग बार-बार पैसा लगाते हैं और धीरे-धीरे आर्थिक व मानसिक दबाव में आ जाते हैं।
यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से पैसे की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।