9 मई: हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, नशा तस्करी और मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों की दर में हिमाचल प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में प्रति एक लाख आबादी पर 17.2 अपराध दर्ज किए गए। इस सूची में पंजाब 19.6 की अपराध दर के साथ पहले स्थान पर है।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 1,715 मामले दर्ज किए गए। यह प्रति लाख आबादी पर 22.8 मामलों की अपराध दर दर्शाता है, जो राष्ट्रीय औसत 7.8 से लगभग तीन गुना अधिक है। इस आधार पर हिमाचल देश में चौथे स्थान पर रहा। इस श्रेणी में केरल सबसे ऊपर है, जहां 27,149 मामले और 75.5 की अपराध दर दर्ज की गई। इसके बाद पंजाब और मिजोरम का स्थान रहा।
प्रदेश में दर्ज कुल मामलों में 423 मामले व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए नशीले पदार्थ रखने से जुड़े थे, जबकि 1,292 मामले तस्करी के उद्देश्य से मादक पदार्थ रखने के पाए गए। तस्करी से संबंधित अपराध दर के मामले में हिमाचल प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर दर्ज किया गया, जहां प्रति लाख आबादी पर 17.2 मामले सामने आए, जो राष्ट्रीय औसत से करीब छह गुना अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में हिमाचल में एनडीपीएस एक्ट के तहत 2,146 मामले दर्ज हुए थे और अपराध दर 28.7 रही थी। हालांकि 2024 में मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है।
एनसीआरबी के आंकड़ों ने हिमाचल में बढ़ते नशे के कारोबार और युवाओं में सिंथेटिक ड्रग्स, खासकर ‘चिट्टा’ के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चला रही हैं, लेकिन रिपोर्ट ने प्रदेश में नशा तस्करी की चुनौती को एक बार फिर उजागर कर दिया है।