23 जुलाई: हिमाचल प्रदेश गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष धर्मपाल चौहान की अध्यक्षता में बुधवार को शिमला स्थित आयोग कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में गौ संरक्षण, गौशालाओं के विकास, आवारा गोवंश के प्रबंधन और आयोग के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में उप निदेशक डॉ. आशा किरण, सहायक निदेशक डॉ. हितेंद्र कुमार वर्मा, पशुपालन विभाग के अधिकारी तथा जगदीश शर्मा उपस्थित रहे।
बैठक में ‘गोपाल योजना’ के तहत प्रदेश की गौशालाओं, गो-सदनों और गौ अभयारण्यों के संचालन के लिए 2 करोड़ 59 लाख 70 हजार 400 रुपये की वित्तीय सहायता जारी करने का निर्णय लिया गया। यह राशि संबंधित जिलों के अधिकारियों को आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से भेज दी गई है, ताकि गौशालाओं में चारा, रखरखाव और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जा सकें।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश की उन गौशालाओं और गो-सदनों की पहचान करने का भी निर्णय लिया गया, जिन्हें उन्नयन और अतिरिक्त सुविधाओं की आवश्यकता है। इसके लिए पशुपालन विभाग के जिला अधिकारियों को ऐसे संस्थानों की सूची तैयार कर आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में आवारा गोवंश से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से सोलन जिले के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) क्षेत्र में पायलट परियोजना के तहत आवारा गोवंश के गले में रेडियम कॉलर लगाने का फैसला लिया गया। इस अभियान में पशुपालन विभाग, पुलिस, बीडीओ, पंचायत प्रतिनिधि, धार्मिक संस्थाएं और स्थानीय प्रशासन मिलकर कार्य करेंगे।
इसके अलावा उपाध्यक्ष के लिए सरकारी आवास उपलब्ध कराने का मामला संबंधित विभाग के समक्ष उठाने, गोसेवा आयोग के नए कार्यालय भवन के संशोधित नक्शे को अंतिम रूप देने तथा शिमला में आयोग के लिए नए कार्यालय परिसर की पहचान कर प्रस्ताव तैयार करने पर भी सहमति बनी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्तमान में अन्य विभागों में प्रतिनियुक्त आउटसोर्स चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वापस गोसेवा आयोग में तैनात किया जाएगा। वहीं, पशुपालन विभाग से प्रतिनियुक्त अधीक्षक ग्रेड-1 के स्थायी पदस्थापन की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के अंत में अधिकारियों ने सभी निर्णयों को समयबद्ध ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में गौ संरक्षण, गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण और आवारा गोवंश के बेहतर प्रबंधन के लिए आयोग प्रभावी कदम उठाता रहेगा।