16 जुलाई: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा जिले की एक नवविवाहिता को उसकी इच्छा के विरुद्ध राजस्थान ले जाने के मामले में गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने लड़की की सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर चिंता जताते हुए पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि उसे 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में हर हाल में अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता आदित्य की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किए।
याचिका के अनुसार, आदित्य और युवती ने 1 फरवरी 2026 को कांगड़ा जिले के चामुंडा माता मंदिर में अपनी इच्छा से विवाह किया था और इसकी जानकारी युवती के परिजनों को भी दी गई थी। हालांकि, लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने के आधार पर युवती के परिवार की शिकायत पर राजस्थान में एफआईआर दर्ज की गई। 16 फरवरी 2026 को युवती ने अपने बयान में स्पष्ट कहा था कि वह अपनी मर्जी से दिल्ली से आई थी और उसने स्वेच्छा से आदित्य से विवाह किया है। इसके बाद मार्च 2026 में दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हुआ था कि युवती को परेशान नहीं किया जाएगा।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 29 जून 2026 को राजस्थान के कोटपुतली उपमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 100 के तहत जारी आदेश का सहारा लेकर युवती के माता-पिता ने स्थानीय कांगड़ा पुलिस को विश्वास में लिए बिना और बिना किसी स्थानीय रिपोर्ट के उसे कांगड़ा से उसकी इच्छा के विरुद्ध राजस्थान ले गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कोटपुतली के उपमंडल दंडाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी मामले में प्रतिवादी बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि 23 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान युवती की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।