9 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में धौलाधार पर्वत श्रृंखला के विभिन्न ट्रेकिंग रूट पर हाल के दिनों में ट्रेकर्स के फंसने, लापता होने और हादसों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब धौलाधार के 10 ट्रेकिंग रूट पर जाने से पहले सभी ट्रेकर्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और 15 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
प्रशासन के अनुसार यह नियम धौलाधार रेंज में 3,600 से 4,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बलेनी, मिंकियानी, भीमघसुत्री, इंद्रहार, कुंडली, तोरल, तालंग, सिंघार, वारू और जलसू दर्रा ट्रेकिंग रूट पर लागू होगा। इन सभी रूट के शुरुआती स्थानों पर आपदा प्रबंधन चेक पोस्ट स्थापित किए जाएंगे, जो प्रतिदिन सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे।
कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि मानसून के दौरान भूस्खलन, घना कोहरा, अचानक बाढ़, कम दृश्यता और फिसलन भरे रास्तों के कारण ट्रेकिंग का जोखिम काफी बढ़ जाता है। कई मामलों में ट्रेकर्स द्वारा अपनी यात्रा और तय रूट की जानकारी पहले से साझा नहीं करने के कारण खोज एवं बचाव अभियान लंबा, कठिन और संसाधन-आधारित बन जाता है, जिससे ट्रेकर्स के साथ-साथ बचाव दल की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
अब प्रत्येक ट्रेकर या ट्रेकिंग समूह को यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित चेक पोस्ट पर व्यक्तिगत रूप से पंजीकरण कराना होगा। इसके साथ ही यात्रा का पूरा विवरण, संपर्क जानकारी और लौटने का संभावित समय भी दर्ज कराना अनिवार्य रहेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन ट्रेकिंग करने या पूर्व सूचना दिए बिना तय रूट से भटकने की स्थिति में यदि किसी दुर्घटना के बाद बचाव अभियान चलाना पड़ता है, तो उसका पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति या समूह से वसूला जाएगा। आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 तथा भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।